वीरांगना मानवती का दिल दहला देने वाला इतिहास
10/2/2012 6:13:44 PM
झाँसी के किले के सामने प्राचीन समय कि खाई में आज जो कि वर्तमान में विकास कि ओर है वीरांगना मानवती हैहयवंशी का इतिहास आज भी दिल दहला देने वाला है I सन १८४८ में वीरांगना मानवती के पति खुमान सिंह डाकुओ से लड़ते लड़ते शहीद हो गये थे उसके बाद मात्र एक पुत्र वीर सिंह ही सहारा था I मानवती ने बर्तन पर कारीगरी अपना जीवन बड़े दुःख में बिता रही थी व् अपने पति का बलिदान उसके मन में उफान ले रहा था I उस समय झाँसी के राजा गंगाधर राव कि पत्नी का स्वर्गवास हो गया उन्होंने दूसरी शादी रानी लक्ष्मीबाई से की उनकी डोली महल में जा रही थी तब रानी लक्ष्मीबाई ने देखा की एक महिला अपने पुत्र को गोद में लेकर रो रही है रानी लक्ष्मीबाई ने उस महिला को पानी पिलाया और महल में आने को कहा I लक्ष्मीबाई ने उस महिला को अपनी महिला सेना में भर्ती कर लिया ये महिला आगे चल कर वीरांगना मानवती के नाम से प्रसिद्ध हुई I

मानवती ने काफी परिश्रम किया और एक बलिदानी बनाने का मन पक्का बना लिया I पहले तोप चलने से पहले बलि देने की परम्परा थी सन १८५६ में नत्थे खां युद्ध में मानवती ने अपने १६ वर्षीय इकलोते पुत्र की भवानी शंकर तोप को बलि दी और स्वयं युद्ध में लड़ते लड़ते वीरगति प्राप्त की I

आज उनका बलिदान लुप्त हो गया है, ३० सितम्बर २००७ में मीडिया प्रभारी अशोक हैहयवंशी ने परिवार सहित झाँसी में स्थित वीरांगना मानवती के परिवार की समाधि स्थल के दर्शन किये व् श्रधा सुमन अर्पित किये साथ ही एक विचार गोष्ठी भी आयोजित की I

आज वीरांगना मानवती का इतिहास, इतिहास में दब रहा है, लकिन आज भी हम उसे प्रणाम करते है I उसका बलिदान हम याद करते है भले सरकार के यहाँ पर वीरांगना मानवती का कोई इतिहास न हो फिर भी हैहयवंशी वीरांगना मानवती के त्याग को हम एक देश भक्ति मानते है I



अमित कुमार के द्वारा facebook पर दिया गया है
   
 
 
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